➤बाहरी राज्यों के अफसरों पर बयान से सुक्खू सरकार में टकराव
➤अनिरुद्ध और विक्रमादित्य आमने-सामने, IAS-IPS संगठनों का कड़ा विरोध
➤ बाहरी अफसरों पर बयान से सरकार में अंदरूनी टकराव
➤ अनिरुद्ध बोले – मंत्रियों को अधिकारियों से काम लेना आना चाहिए
➤ IAS-IPS एसोसिएशन ने बयान को बताया भेदभावपूर्ण
हिमाचल प्रदेश सरकार में बाहरी राज्यों से आए IAS और IPS अधिकारियों को लेकर दिए गए बयानों के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर टकराव गहरा गया है। इस मुद्दे पर पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह आमने-सामने आ गए हैं। वहीं, दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के संगठनों ने भी सरकार के भीतर उभरे इस विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
बुधवार को प्रेस वार्ता के दौरान अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि मंत्रियों को अधिकारियों से काम करवाना आना चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अधिकारी सरकार के स्तंभ होते हैं और उनका मूल राज्य कोई मायने नहीं रखता। अनिरुद्ध सिंह ने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश में अधिकांश अधिकारी बाहरी राज्यों से हैं और सभी ने UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास कर सेवा में प्रवेश किया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे बयान, जिनसे अधिकारियों की पहचान उनके राज्य के आधार पर की जाए, मनोबल तोड़ने वाले होते हैं और इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ता है।
दूसरी ओर, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने अपने फेसबुक अकाउंट पर जारी वीडियो में बिना किसी का नाम लिए कहा कि वे वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों का सम्मान करते हैं, लेकिन
“मैं वैसा सम्मान नहीं कर सकता, जैसा घायल NHAI अधिकारियों का हुआ।”
उन्होंने कहा कि यदि हिमाचल प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए उन्हें किसी के सामने कठोर भी बनना पड़े, तो वे इसके लिए तैयार हैं। विक्रमादित्य सिंह ने यह भी कहा कि उप मुख्यमंत्री ने उनकी बात का समर्थन किया है।
इस बयान के बाद सबसे पहले राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसा कोई मामला नहीं है, जैसा दिखाया जा रहा है। इसके बाद अनिरुद्ध सिंह ने सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई। इसके जवाब में विक्रमादित्य सिंह ने पुराने विवाद का हवाला देकर पलटवार किया, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
इस पूरे विवाद के बीच हिमाचल प्रदेश IAS एसोसिएशन ने मंत्री के बयान पर गहरी चिंता जताई है। एसोसिएशन ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां प्रशासनिक निष्पक्षता और अधिकारियों के मनोबल को नुकसान पहुंचाती हैं।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि हिमाचल में कार्यरत सभी IAS अधिकारी, चाहे वे राज्य के मूल निवासी हों या अन्य राज्यों से आए हों, ऑल इंडिया सर्विस का हिस्सा हैं। उनका पहला कर्तव्य जनता की निष्पक्ष सेवा, सरकार की नीतियों का ईमानदारी से क्रियान्वयन और कानून का शासन सुनिश्चित करना है।
IAS एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया है कि अधिकारियों की गरिमा और सम्मान बनाए रखने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही सार्वजनिक विमर्श नीतियों और परिणामों तक सीमित रहे, न कि अधिकारियों की क्षेत्रीय पृष्ठभूमि पर।
वहीं, हिमाचल प्रदेश IPS एसोसिएशन ने भी मंत्री के बयान को हिमाचली और गैर-हिमाचली अधिकारियों के बीच अवांछित विभाजन पैदा करने वाला करार दिया। एसोसिएशन ने कहा कि इससे पुलिस सेवा के मनोबल को नुकसान पहुंचा है और प्रशासनिक निष्पक्षता प्रभावित हो रही है।
IPS एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि भविष्य में इस तरह के बयान दोहराए न जाएं। इसके साथ ही यह भी आग्रह किया गया कि संबंधित मंत्री के साथ किसी IPS अधिकारी की तैनाती न की जाए, ताकि कार्य वातावरण पर नकारात्मक असर न पड़े।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि IPS अधिकारी किसी भी राज्य या कैडर से हों, उनका उद्देश्य केवल हिमाचल प्रदेश की जनता की ईमानदारी और निष्पक्षता से सेवा करना है। किसी अधिकारी की नीयत या कार्यक्षमता पर उसके जन्मस्थान के आधार पर सवाल उठाना तथ्यात्मक रूप से गलत है।



